भारतीय वेबसाइटों पर साइबर हमलों में उछाल, 2025 में 265 मिलियन हमले दर्ज

नई दिल्ली, 5 दिसंबर 2025 — भारत में साइबर सुरक्षा खतरे तेजी से बढ़ रहे हैं। सिक्योरिटी फर्म Seqrite (Quick Heal Technologies की एंटरप्राइज शाखा) की नवीनतम रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2025 में भारतीय वेबसाइटों पर 265 मिलियन से अधिक साइबर-हमले दर्ज किए गए। यह संख्या पिछले वर्षों की तुलना में उल्लेखनीय वृद्धि दर्शाती है और यह संकेत देती है कि डिजिटल जोखिम का दायरा तेजी से बढ़ रहा है।

किन पर सबसे ज्यादा खतरा?

रिपोर्ट के अनुसार, हमले कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों को निशाना बना रहे हैं:

  • सरकारी पोर्टल और सेवाएं

  • बैंकिंग एवं वित्तीय संस्थान

  • कॉर्पोरेट और बड़ी कंपनियां

  • ई-कॉमर्स तथा उपभोक्ता प्लेटफॉर्म

थ्रेट-वेक्टर (हमले के रास्ते) अधिक विविध और परिष्कृत हो रहे हैं, जिनमें फिशिंग, रैनसमवेयर, डेटा एक्सफिल्ट्रेशन और DDoS शामिल हैं।

नए सुरक्षा समाधान लॉन्च

बढ़ते स्ट्रेस को देखते हुए, कंपनी ने दो नए एंटरप्राइज समाधान लॉन्च किए हैं:

  • Digital Risk Protection Service (DRPS) – यह डार्क वेब, सोशल प्लेटफॉर्म और ओपन-सोर्स डेटा पर संगठन की जोखिम निगरानी करेगा।

  • Ransomware Recovery as a Service (RRaaS) – रैनसमवेयर हमले की स्थिति में तेजी से रिकवरी और ऑपरेशन बहाली पर केंद्रित है।

कंपनी का कहना है कि हमलों की संख्या और जटिलता अब ऐसी है कि संगठनों को केवल रोकथाम नहीं, बल्कि रेस्पॉन्स और रिकवरी क्षमता भी बनानी होगी।

भारत के लिए क्या संदेश?

रिपोर्ट इस बात की पुष्टि करती है कि देश भर में डिजिटल सेवाओं के विस्तार के साथ साइबर जोखिम भी बढ़ रहे हैं।
विशेषज्ञ मानते हैं कि:

  • निरंतर थ्रेट-मॉनिटरिंग

  • वल्नरेबिलिटी मैनेजमेंट

  • इन्सिडेंट-रिस्पॉन्स प्लानिंग

  • बैकअप और रिकवरी प्रशिक्षण

अब अनिवार्य हो गए हैं।

छात्रों और टेक-प्रोफेशनल्स के लिए संकेत

साइबरसिक्योरिटी में रुचि रखने वाले विद्यार्थियों और युवा पेशेवरों के लिए यह परिदृश्य एक स्पष्ट अवसर और चुनौती दोनों है।
भारत में साइबर-टैलेंट की मांग बढ़ रही है:

  • SOC विश्लेषक

  • थ्रेट इंटेलिजेंस

  • फॉरेंसिक

  • रैनसमवेयर रेस्पॉन्स

  • क्लाउड सुरक्षा

इन क्षेत्रों में विशेषज्ञता रोजगार और करियर निर्माण दोनों के लिए उपयोगी हो सकती है।

निष्कर्ष

साइबर हमलों की संख्या ने यह स्पष्ट कर दिया है कि भारत का डिजिटल इकोसिस्टम अब अत्यधिक लक्षित हो रहा है।
रोकथाम के साथ-साथ प्रतिक्रिया और पुनर्प्राप्ति क्षमता विकसित करना आवश्यक हो गया है।
संगठनों, सरकार और उपयोगकर्ताओं को सुरक्षा मानकों को प्राथमिकता देनी होगी ताकि बढ़ते डिजिटल जोखिमों का सामना किया जा सके।