शाह द्वारा निर्धारित ऑपरेशनल डेडलाइन से पहले सुरक्षा एजेंसियों ने हासिल की निर्णायक सफलता: 76 CRPF जवानों की हत्या के मास्टरमाइंड नक्सली हिड़मा को 12 दिन पहले ही किया गया ढेर
छत्तीसगढ़ में नक्सल मोर्चे पर सुरक्षा बलों ने एक रणनीतिक milestone हासिल किया है। केंद्रीय गृह नेतृत्व द्वारा नक्सली कमांडर हिड़मा के लिए तय की गई ऑपरेशनल टाइमलाइन से 12 दिन पहले ही इस हाई-वैल्यू टारगेट को eliminate कर दिया गया। हिड़मा को 76 CRPF जवानों की निर्मम हत्या समेत कई बड़े हमलों का प्रमुख मास्टरमाइंड माना जाता था, और वर्षों से सुरक्षा एजेंसियों की priority target-list में शामिल था।
ऑपरेशन से जुड़े उच्च-स्तरीय इनपुट के अनुसार, यह एंटी-नक्सल एक्शन multi-agency coordination, advanced field intelligence और precision-driven tactical planning का परिणाम रहा। हिड़मा की लोकेशन को pinpoint करने के लिए layered surveillance framework, ground assets और तकनीकी इनपुट का integrated deployment किया गया था।
ऑपरेशनल डेडलाइन को पूरा करना ही चुनौतीपूर्ण था, लेकिन उससे पहले लक्ष्य को neutralize किया जाना सुरक्षा बलों की क्षमता, synergy और execution discipline का एक prominent reflection माना जा रहा है।
विश्लेषकों का मानना है कि हिड़मा का elimination नक्सली नेटवर्क की कमांड संरचना पर direct operational shock पैदा करेगा। यह न केवल स्थानीय मॉड्यूल्स की mobilisation capability को disrupt करेगा, बल्कि recruitment, logistics और planning architecture पर भी long-term impact डालेगा।
गृह मंत्रालय के सर्किल में इसे नक्सल उन्मूलन अभियान के लिए एक decisive inflection point के रूप में देखा जा रहा है। अधिकारियों के अनुसार, यह सफलता आने वाले दिनों में क्षेत्रीय सुरक्षा ग्रिड को और assertive तथा impact-oriented बनाएगी।
राज्य और केंद्रीय एजेंसियों का फोकस अब residual नेटवर्क्स को de-escalate करने और प्रभावित क्षेत्रों में governance footprint को मजबूत करने पर रहेगा।
