मेडिकल कॉलेजों में तीन वर्ष बाद सीधी भर्ती का रोलआउट: असिस्टेंट प्रोफेसर के 125 पदों पर परीक्षा, कुल आवश्यकता का मात्र 10%—लगभग 40% सीटें रिक्त रहने की आशंका
राज्य के मेडिकल शिक्षा ढांचे में लंबे अंतराल के बाद एक बार फिर डायरेक्ट भर्ती प्रक्रिया सक्रिय हो रही है। लगभग तीन वर्षों की भर्ती-स्थिरता के बाद अब मेडिकल कॉलेजों में असिस्टेंट प्रोफेसर के 125 पदों पर परीक्षा-आधारित चयन का औपचारिक निर्णय लिया गया है। यह संख्या कुल sanctioned requirement के मुकाबले मात्र लगभग 10% है, जिसके चलते विशेषज्ञों का अनुमान है कि संस्थानों में करीब 40% पद आगामी चक्र में भी खाली रह सकते हैं।
हेल्थ एजुकेशन डिपार्टमेंट के अनुसार, वर्तमान रिक्तियों का volume कई विभागों में academic delivery, क्लिनिकल सेवाओं और PG ट्रेनिंग ecosystem पर direct operational impact डाल रहा है। हालांकि 125 पदों की परीक्षा को immediate capacity enhancement के रूप में देखा जा रहा है, लेकिन कुल faculty strength को stabilize करने के लिए अभी भी एक multi-phase recruitment रोडमैप की आवश्यकता बताई जा रही है।
मेडिकल कॉलेज प्रशासनिक इकाइयों का कहना है कि सीमित संख्या में होने वाली यह परीक्षा संस्थानों में critical subjects—जैसे एनाटॉमी, फिजियोलॉजी, मेडिसिन, सर्जरी और पैराक्लिनिकल स्पेशियलिटी—की faculty gaps को आंशिक रूप से address कर पाएगी। वहीं experts का मानना है कि वास्तविक क्षमता-निर्माण के लिए बड़े पैमाने पर, समयबद्ध और recurring vacancy cycles की जरूरत है।
रिक्तियों के अधिक और seats के कम विज्ञापित होने से academic load distribution, मरीजों की सेवा क्षमता और teaching-learning productivity पर sustained pressure बने रहने की संभावना जताई जा रही है।
डिपार्टमेंटल इनपुट के मुताबिक, इस चरण के बाद आगे भी incremental भर्ती राउंड संचालित करने का प्रस्ताव विचाराधीन है, जिससे राज्य के मेडिकल कॉलेजों में faculty pipeline को structurally strengthen किया जा सके।
