ग्राम कनेक्टिविटी पर गवर्नेंस पिच तेज़: 22 अप्रोच सड़कों पर अब डामरीकरण अनिवार्य, ‘नक्सल बाधा’ तर्क स्वीकार नहीं—स्थानीय इंफ्रास्ट्रक्चर को फास्ट-ट्रैक मॉड में अपग्रेड करने की तैयारी

ग्रामीण कनेक्टिविटी को मजबूत करने की दिशा में प्रशासन ने स्पष्ट संकेत दिए हैं कि जिन 22 ग्रामीण सड़कों पर केवल मिट्टी–गिट्टी डालकर कार्य अधूरा छोड़ दिया गया था, उन्हें अब पूर्ण डामर रोड के रूप में फाइनलाइज़ करना होगा।

डिस्ट्रिक्ट इंजीनियरिंग विंग ने यह भी साफ कर दिया है कि इन प्रोजेक्ट्स में “नक्सल प्रभावित क्षेत्र” का पारंपरिक बहाना अब वर्कफ़्लो में डिले फैक्टर के रूप में स्वीकार नहीं किया जाएगा। सिस्टम की अपेक्षा है कि सभी कंस्ट्रक्शन यूनिट्स प्रोजेक्ट शेड्यूलिंग और ऑन-ग्राउंड डिलिवरेबल्स पर टाइम-बाउंड परफॉर्मेंस सुनिश्चित करें।

ग्राउंड रिपोर्ट्स के मुताबिक कई सड़कें महीनों से प्राथमिक लेयर (मिट्टी व गिट्टी) पर छोड़ दी गई थीं, जिससे न केवल आवागमन प्रभावित हो रहा था, बल्कि मॉनसून सीज़न में क्षरण और इरोशन भी बढ़ गया था।

अब नए निर्देशों के बाद संबंधित एजेंसियों को—

  • डामर बिछाने की प्रक्रिया को री-शेड्यूल,

  • मटेरियल सप्लाई को स्टेबलाइज़,

  • और फील्ड सुपरविजन को इंटेंसिफाई
    करने को कहा गया है।

प्रशासन का लक्ष्य है कि इन मार्गों को पूर्ण फंक्शनल रूरल रोड एसेट्स के रूप में जल्द से जल्द तैयार किया जाए, ताकि गांव-स्तर पर ट्रांसपोर्ट, हेल्थ एक्सेस, एग्री-कमोडिटी मूवमेंट और इमरजेंसी रिस्पॉन्स सभी को ऑपरेशनल एडवांटेज मिल सके।

स्थानीय स्तर पर इस निर्णय को सकारात्मक प्रतिक्रिया मिल रही है, क्योंकि डामरीकरण के बाद इन इलाकों की मोबिलिटी और इकोनॉमिक आउटपुट दोनों में सुधार की उम्मीद है।