करगिल के वीर डॉक्टर ब्रिगेडियर लहरी: 1000 से ज़्यादा जवानों की सर्जरी की, आज व्हीलचेयर पर, सरकार ने भुला दिया

रायपुर | करगिल युद्ध में जहां जवान दुश्मन से मोर्चा ले रहे थे, वहीं एक भारतीय सैन्य अफसर ब्रिगेडियर प्रणब लहरी (रिटायर्ड) श्रीनगर के बेस हॉस्पिटल में घायल सैनिकों को जिंदगी दे रहे थे। उन्होंने 1000 से ज्यादा जवानों की सर्जरी की, कई की जान बचाई – पर आज जब वो पार्किंसन्स जैसी गंभीर बीमारी से जूझ रहे हैं, राज्य और समाज उन्हें भूल गया है।

करगिल युद्ध की यादें आज भी उन्हें रुला देती हैं। भावुक होकर उन्होंने बताया,

“कैप्टन विक्रम बत्रा ने मुझसे कहा था – या तो तिरंगा लहरा कर आऊंगा या तिरंगे में लिपट कर… और वे तिरंगे में लिपटकर आए। उनके जैसे बहादुरों की वजह से हम जीत सके।”

ब्रिगेडियर लहरी 92 मिलिट्री बेस हॉस्पिटल, श्रीनगर में ऑर्थोपेडिक सर्जन थे। युद्ध के दौरान पाकिस्तान द्वारा दागा गया 45 पाउंड का गोला ऑपरेशन थिएटर के पास गिरा, जहां वो सर्जरी कर रहे थे। ब्लास्ट में मेडिकल बंकर, उपकरण, सिग्नल सिस्टम और राशन जल गया। सात दिनों तक उनकी कोई खबर नहीं थी। आठवें दिन सूचना आई कि वे जीवित हैं और घायलों का इलाज कर रहे हैं

उनकी पत्नी निवेदिता लहरी बताती हैं:

“उन्हें करगिल में उत्कृष्ट युद्ध सेवा के लिए सेना मेडल मिला। वो छत्तीसगढ़ राज्य बनने के बाद पहले सेना मेडल विजेता हैं, लेकिन आज न सरकार ने कोई सम्मान दिया, न सहायता। व्हीलचेयर पर हैं, मैं अकेले देखभाल कर रही हूं।”

ब्रिगेडियर लहरी रायपुर में पले-बढ़े, मेडिकल कॉलेज में टॉप किया, करगिल और सियाचिन जैसे दुर्गम क्षेत्रों में सेवा दी।
2014 में रिटायर होने के बाद, उनकी तबीयत बिगड़ने लगी। आज उन्हें पार्किंसन्स डिजीज है, जिससे उनकी याददाश्त, सोचने की क्षमता और शारीरिक स्थिति पर असर पड़ा है।

“छत्तीसगढ़ के लोग नहीं जानते कि करगिल का एक वीर योद्धा आज उनके शहर में गुमनामी की ज़िंदगी जी रहा है,” – निवेदिता लहरी