हास्य का सूरज अस्त हुआ: पद्मश्री कवि सुरेंद्र दुबे नहीं रहे

रायपुर। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रसिद्ध छत्तीसगढ़ के हास्य कवि पद्मश्री सुरेंद्र दुबे का आज को निधन हो गया। बताया जा रहा है कि उन्हें दिल का दौरा (हार्ट अटैक) पड़ा था। वे रायपुर के एडवांस कार्डियक इंस्टीट्यूट में उपचाररत थे। दुबे जी के पारिवारिक मित्र और भाजपा नेता उज्ज्वल दीपक ने उनके निधन की जानकारी सोशल मीडिया के माध्यम से साझा की।

साहित्य और मंचीय कविता को हास्य की अनोखी दृष्टि देने वाले दुबे जी अपने तीखे व्यंग्य और सरल शैली के लिए जाने जाते थे।

दिलचस्प बात यह है कि वर्ष 2018 में राजस्थान के एक अन्य कवि सुरेंद्र दुबे के निधन की खबर इंटरनेट पर फैलने से लोगों में भ्रम पैदा हो गया था। उस समय छत्तीसगढ़ के कवि सुरेंद्र दुबे ने इस घटना पर व्यंग्यात्मक कविता लिखी थी, जो मंचों पर खूब सराही गई। उनकी कविता की कुछ प्रसिद्ध पंक्तियां थीं:

“टेंशन में मत रहना बाबू, टाइगर अभी जिंदा है!”
“मेरी पत्नी को एक आदमी ने फोन किया
वो बोला- दुबे जी निपट गए,
मेरी पत्नी बोली- ऐसे हमारे भाग्य कहां हैं!”

“मरघट की लकड़ी वाला बोला-
नहीं मरे तो मेरा ₹1600 नुकसान हो जाएगा…”

आज सच में हास्य का कोकड़ा और ठहाके का परिंदा इस दुनिया को अलविदा कह गया। लेकिन उनकी कविताएं, अंदाज़ और मुस्कानें, हमेशा लोगों के चेहरों पर हंसी बिखेरती रहेंगी।

🕯️ श्रद्धांजलि पद्मश्री सुरेंद्र दुबे जी को।

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