“ईरान-अमेरिका तनाव के बीच भारत पर संकट: स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बंद होने से महंगा हो सकता है पेट्रोल-डीजल”

ईरान की संसद ने हाल ही में अमेरिकी हवाई हमलों के जवाब में स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को बंद करने का प्रस्ताव पास किया है। यह समुद्री रास्ता फारस की खाड़ी को ओमान की खाड़ी और अरब सागर से जोड़ता है और दुनिया के 20-25% कच्चे तेल और 25% प्राकृतिक गैस की सप्लाई इसी रास्ते से होती है। यह रास्ता महज 33 किलोमीटर चौड़ा है, लेकिन रणनीतिक दृष्टि से बेहद अहम है। भारत के लिए यह रास्ता और भी महत्वपूर्ण है क्योंकि देश का 40% से अधिक तेल आयात इसी रास्ते से होता है। अगर यह बंद होता है, तो भारत समेत दुनियाभर में तेल की सप्लाई बाधित हो सकती है।

22 जून को अमेरिका द्वारा ईरान के तीन परमाणु ठिकानों—नतांज, फोर्डो और इस्फहान—पर हवाई हमले किए गए, जिससे नाराज ईरान की संसद ने इस अहम समुद्री मार्ग को बंद करने का प्रस्ताव पारित किया। हालांकि, इस फैसले को लागू करने के लिए ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला खामेनेई और नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल की मंजूरी आवश्यक है। ईरान का कहना है कि अगर उसे और उकसाया गया, तो वह स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को बंद कर वैश्विक तेल आपूर्ति में व्यवधान उत्पन्न करेगा।

अगर यह रास्ता अस्थायी या स्थायी रूप से बंद होता है, तो इसका सीधा असर भारत में पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर पड़ेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे कच्चे तेल की कीमतें 30 से 50% तक बढ़ सकती हैं। फिलहाल ब्रेंट क्रूड की कीमत 80 डॉलर प्रति बैरल के आसपास है, लेकिन यह 120 से 150 डॉलर प्रति बैरल तक जा सकता है। अगर ऐसा हुआ, तो भारत में पेट्रोल की कीमत 120 रुपये प्रति लीटर या उससे अधिक हो सकती है। इसके अलावा, ट्रांसपोर्ट महंगा होने से खाद्य पदार्थ, दवाइयों और अन्य आवश्यक वस्तुओं की कीमतों में भी इजाफा हो सकता है।

हालांकि भारत ने हाल के वर्षों में अपनी तेल आपूर्ति को काफी हद तक विविध किया है। केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी के अनुसार, भारत रोजाना 5.5 मिलियन बैरल तेल की खपत करता है, जिसमें से सिर्फ 1.5 से 2 मिलियन बैरल स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से आता है। शेष तेल रूस, अमेरिका, पश्चिम अफ्रीका और ब्राजील जैसे देशों से आता है। वर्ष 2025 के जून महीने में भारत ने रूस से औसतन 2.16 मिलियन बैरल प्रतिदिन तेल आयात किया। हालांकि इराक, सऊदी अरब, यूएई और कुवैत जैसे देशों से जो तेल आता है, उसका मार्ग अब भी यही है, और अगर यह बाधित होता है, तो भारत को वैकल्पिक मार्ग जैसे ‘केप ऑफ गुड होप’ से तेल लाना पड़ेगा, जिससे 7 से 13 दिन ज्यादा और प्रति यात्रा 1 मिलियन डॉलर (लगभग 8.66 करोड़ रुपये) अतिरिक्त खर्च आएगा।

भारत सरकार इस पूरे घटनाक्रम पर नजर रखे हुए है। हरदीप सिंह पुरी ने भरोसा दिलाया है कि भारत के पास कई हफ्तों का तेल भंडार मौजूद है और तेल कंपनियां वैकल्पिक स्रोतों से आपूर्ति सुनिश्चित कर रही हैं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत ने तेल आपूर्ति को रणनीतिक रूप से डायवर्सिफाई किया है और हमारे पास देशभर में तीन रणनीतिक भंडार भी हैं—पुडुर (2.25 मिलियन मीट्रिक टन), विशाखापट्टनम (1.33 मिलियन मीट्रिक टन) और मेंगलुरु (1.5 मिलियन मीट्रिक टन)।

हालांकि, स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को पूरी तरह बंद करना आसान नहीं है। इस क्षेत्र में दो-दो मील की शिपिंग लेन हैं और इसे बंद करने के लिए ईरान को सैन्य कार्रवाई जैसे टैंकरों पर हमले या समुद्र में माइंस बिछाने जैसी गतिविधियों का सहारा लेना होगा। अमेरिका और सऊदी अरब जैसे देश इस स्थिति में जवाबी सैन्य कार्रवाई कर सकते हैं। विशेषज्ञ मानते हैं कि ईरान पूरी तरह इस रास्ते को बंद नहीं करेगा, क्योंकि इससे चीन जैसे उसके मित्र देशों को भी नुकसान हो सकता है। फिर भी आंशिक रुकावट भी वैश्विक तेल बाजार को अस्थिर कर सकती है।

इसलिए अगर ये स्थिति लंबी खिंचती है, तो भारत में न सिर्फ पेट्रोल-डीजल बल्कि आम जरूरतों की चीजें भी महंगी हो सकती हैं। हालांकि फिलहाल सरकार ने स्थिति पर नियंत्रण की बात कही है और संकट से निपटने की तैयारी का भरोसा जताया है।

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