राष्ट्रपति ने अपने भाषण में छत्तीसगढ़ से गहरे लगाव का जिक्र करते हुए कहा, “छत्तीसगढ़िया सबसे बढ़िया”
राष्ट्रपति ने अपने भाषण में छत्तीसगढ़ से अपने गहरे लगाव को व्यक्त किया, यह कहते हुए कि वे यहां कई बार आ चुकी हैं और यहां के लोग बेहद अच्छे होते हैं। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़िया ‘सबसे बढ़िया’ होते हैं। इसके साथ ही, राष्ट्रपति ने राज्य की सीमाओं से परे दिलों के संबंधों की बात की। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि, भले ही परिसीमन की सीमाएं हो, दिल से हम सब एक हैं, चाहे वह छत्तीसगढ़ हो या ओडिशा। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि बरगढ़ और संबलपुर को छत्तीसगढ़ का हिस्सा मानते हैं, और रायपुर को ओडिशा का।

राष्ट्रपति ने जगन्नाथ देवता के वैश्विक महत्व को भी रेखांकित किया, यह कहते हुए कि वे सिर्फ ओडिशा के नहीं, बल्कि पूरे विश्व के हैं। विशेष रूप से छत्तीसगढ़ में पकने वाला 56 कोटि का चावल और उसका प्रसाद पूरे विश्व में खाया जाता है। इसके बाद, राष्ट्रपति ने गुरु घासीदास की 250 साल पुरानी समाज सुधार की यात्रा को याद करते हुए सभी से उनका संकल्प पूरा करने की अपील की। उन्होंने यह भी कहा कि छत्तीसगढ़ का विकास एक उच्च लक्ष्य होना चाहिए और श्रेष्ठ छत्तीसगढ़ के निर्माण में सबको योगदान देना चाहिए।

नक्सलवाद के मुद्दे पर राष्ट्रपति ने कहा कि छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद का खात्मा अब अंतिम चरण में है, और प्रभावित क्षेत्रों के लोग अब विकास के मार्ग पर आगे बढ़ने के लिए तैयार हैं। छत्तीसगढ़ में विकास की असीम संभावनाओं का जिक्र करते हुए, उन्होंने राज्य में सीमेंट, खनिज उद्योग, स्टील, एल्यूमिनियम, और विद्युत उत्पादन जैसे क्षेत्रों में विकास के अवसरों का उल्लेख किया।

राष्ट्रपति ने राज्य की पारंपरिक लोक शिल्प और प्राकृतिक सुंदरता की सराहना करते हुए कहा कि यहां के हरे-भरे जंगल और झरने पर्यटकों को आकर्षित करते हैं। इसके अलावा, उन्होंने यह भी बताया कि अब तक छत्तीसगढ़ विधानसभा में 565 विधेयक पारित हो चुके हैं, जिनमें कई समाजिक विकास से संबंधित हैं, जो राज्य में विकास की दिशा को दर्शाते हैं।
महिला विधायकों के संदर्भ में राष्ट्रपति ने उन्हें प्रोत्साहित किया कि वे जीवन के हर क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए प्रयासरत रहें और समाज में महिला शक्ति को मजबूती से पहचान दिलाने के लिए काम करें। उन्होंने मिनीमाता के योगदान को भी याद किया, जो छत्तीसगढ़ से संसद जाने वाली पहली महिला जन सेवक थीं और लगातार पांच बार लोकसभा में सांसद बनीं। उनका योगदान महिलाओं के कल्याण और उत्थान में अतुलनीय था, और उनका कार्य सभी को प्रेरित करने वाला है।
