सारंगपुरी की 5.20 एकड़ बंजर जमीन पर छाई हरियाली: सामुदायिक प्रयास से बदला परिदृश्य

सारंगपुरी गांव की वह 5.20 एकड़ जमीन, जो वर्षों तक बंजर पड़ी थी, अब हरी-भरी होकर नई पहचान बना रही है। स्थानीय समुदाय, वन विभाग और स्वयंसेवी संगठनों के संयुक्त प्रयास से यह क्षेत्र अब हरियाली का केंद्र बन गया है। पहले जहां धूल उड़ती थी, अब वहां पेड़ों की कतारें, पौधों की खुशबू और विकसित होती जैव विविधता नजर आ रही है।

जल और मिट्टी संरक्षण से बदला भू-स्वरूप

विशेषज्ञों के अनुसार, जमीन की उर्वरता बेहद कम थी और वर्षा का पानी इतनी तेजी से बह जाता था कि पौधे विकसित ही नहीं हो पाते थे।
परियोजना के तहत:

  • कंटूर ट्रेंच,

  • चेकडैम,

  • मिट्टी सुधार,

  • और सिंचाई के छोटे साधन
    तैयार किए गए, जिसके बाद भूमि ने नमी पकड़ना शुरू किया।

इसके बाद रोपित पौधे तेजी से बढ़ने लगे।

5000 से अधिक पौधे लगाए गए

स्थानीय ग्रामवासियों और युवा समूहों ने पिछले दो वर्षों में 5000 से अधिक पौधे लगाए। इनमें शामिल हैं:

  • सागौन

  • आम

  • नीम

  • करंज

  • अमलतास

  • फलदार और छायादार पौधे

आज क्षेत्र में लगभग 80 प्रतिशत पौधे जीवित हैं, जो परियोजना की सफलता को दर्शाते हैं।

गांववासियों में उत्साह

गांव के लोगों का कहना है कि यह भूमि पहले किसी काम की नहीं थी, लेकिन अब यह गांव की पहचान बन रही है। हरियाली बढ़ने से

  • वातावरण शुद्ध हो रहा है

  • पशुओं के लिए चारा उपलब्ध हो रहा है

  • तापमान में कमी महसूस की जा रही है

  • और मिट्टी कटाव भी कम हुआ है

वन विभाग ने दी तकनीकी सहायता

वन विभाग ने रोपण तकनीक, पौध चयन और भूमि संरक्षण मॉडल में मुख्य भूमिका निभाई। विभाग का कहना है कि यह परियोजना ग्रामीण सहभागिता का बेहतरीन उदाहरण है, जिसे अन्य गांव भी अपना सकते हैं।

भविष्य की योजनाएँ

स्थानीय समिति अब इस क्षेत्र को मिनी-इको पार्क के रूप में विकसित करने की योजना बना रही है। इसमें:

  • वॉकिंग पाथ,

  • बायोडायवर्सिटी ज़ोन,

  • वाटर पॉइंट,

  • और सामुदायिक संरक्षण दल
    जैसी व्यवस्थाएँ शामिल होंगी।

हरियाली का फैलता दायरा

सारंगपुरी में हुआ परिवर्तन न सिर्फ पर्यावरणीय सुधार का संकेत है, बल्कि यह दिखाता है कि सामूहिक प्रयास से बंजर भूमि को भी जीवन दिया जा सकता है।